मोहब्बत
हमनें उम्मीदों के दरिया में
एकतरफा मोहब्बत की नौका उतारी,
सोचा साहिल ना सही साथ तो मिल जाएगा,
अजनबी शहर में कोई अपना कहकर बुलाएगा,
अंजाम जो हुआ वो मुझे ताउम्र सताएगा,
बिछड़ने का गम उन्हें कितना है,
ये हमे मालूम नहीं,
पर ये नादान परिंदा अब कभी ;;;;;;;;