Saturday, 28 September 2013

Thursday, 19 September 2013

मोहब्बत

मोहब्बत 

हमनें उम्मीदों के दरिया में
एकतरफा मोहब्बत की नौका उतारी,
सोचा साहिल ना सही साथ तो मिल जाएगा,
अजनबी शहर में कोई अपना कहकर बुलाएगा,
अंजाम जो हुआ वो मुझे ताउम्र सताएगा,
 बिछड़ने का गम उन्हें कितना है,
ये हमे मालूम नहीं,
पर ये नादान परिंदा अब कभी ;;;;;;;;