Sunday, 19 July 2015

तुम्हारे चेहरे पर पड़ी पसीने की बूंदें

वक्त बेवक्त तुम्हारे चेहरे पर पड़ी मोतियों सी पसीने की बूंदें
जला रही थी मुझे,
वो मेरी मौजूदगी में भी तुम्हारा स्पर्श करता
बार-बार तुम्हारे चाँद से चेहरे को 
कम्बखत अपनी बूंदों से सरोबार करता,
कभी तुम्हारी आँखों में आता,
कभी तुम्हारे गर्म होठों को स्पर्श करता
और अपनी मनमानी करते हुए
चुपचाप तुम्हारी अधरों में समा जाता |
बेचैन हो जाता था,
मैं इन पसीने की बूंदों की किस्मत देखकर,
ये जब चाहे तुम्हारा स्पर्श कर सकते थे
एक दिन मेरे सब्र का बाँध टुटा
और मैं पसीने की बूंदों से पूछ बैठा
क्यूँ परेशान करता है तू मेरी बेचैन हुस्न को
उसने मुझे मुस्कुरा कर कहा
क्या मोहब्बत करना सिर्फ तुम्हें ही आता है ? 
उसने शब्दों का कारवां आगे बढ़ाते हुए कहा
अरे पगले हमारी मोहब्बत तो निः स्वार्थ है
मैं तुम्हारी माशुका के चेहरे पर आता हूँ
उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगाता हूँ
और बिना किसी कामना वासना के काल कलवित हो जाता हूँ | 
उसके शब्दों ने मुझे थोड़ा लज्जित किया,
लेकिन निः स्वार्थ प्रेम की उसकी विचारधारा ने
मुझे मोहब्बत का बड़ा फलसफा दिया था | 
अब तुम्हारे चेहरे पर पड़ी पसीने की बूंदें
मेरे दिल को बड़ा सुकून दे रही थी | 

Thursday, 16 July 2015

बाहुबली में,एक्टिंग की बहुत कमी खली

गली,नुक्कड़,मेट्रो,मॉल,ऑफिस हर जगह बाहुबली का शोर मचा था | मैंने सोचा जब इतने लोग बाहुबली-बाहुबली चिल्ला रहे हैं तो जरूर इसमें कुछ बात होगी | बस कल कार्यालय से निकलकर अपने कुछ परिजनों के साथ जा पहुंचा बाहुबली की तपिश महसूस करने | शुरुआती दृश्यों को देखकर कुछ देर के लिए लगा कि सच में यह शोर वाजिब था | स्क्रीनप्ले,ग्राफ़िक्स सिनेमेटोग्राफी ये सब थोड़ा हॉलीवुड वाली Good फीलिंग दे रहे थे | लेकिन यह सुखद एहसास बस दस-पंद्रह मिनट के अंदर ही काल कलवित होने लगा | फिल्म जैसे-जैसे आगे बढ़ते गई मुझे लगा जैसे मैं किसी कॉमिक्स के किरदारों को परदे पर जीवंत देख रहा हूँ |
                                                                   संवाद अदायगी में भाव शून्यता | बाहुबली द्वारा शिवलिंग को ऐसे उठाना जैसे वह सुबह-सुबह व्यायाम कर रहा हो |और उसका बार-बार 40 फ़ीट की ऊंचाई से पानी में ऐसे गिरना मानो वह ओलंपिक में Qualify करने की जी तोड़ कोशिश कर रहा हो | कुल मिलाकर फिल्म समय के साथ-साथ सच्चाई और वास्तविकता से मुझे कोसों दूर लेके जा रही थी | उसपर से रही सही कसर जबरदस्ती ठूंसे गए गानों ने निकाल दी | मैं उन गानों के वक्त कान में ईयर फोन लगाकर सोच रहा था कि बहुत अच्छा हुआ जो गांधी जैसी महान ऐतिहासिक फिल्म रिचर्ड एटनबरो ने बनाई |अगर यही फिल्म करण जोहर,डेविड धवन,राम गोपाल वर्मा या किसी अन्य typical bollywood type निर्देशक (जिनकी एकमात्र रचनात्मकता हॉलीवुड फिल्मों को केवल बॉलीवुड का तड़का लगाना होती है ) ने बनाई होती तो जरा सोचिये बेन किंग्सले (गांधी ) और रोहिणी हटंगटे (बा ) को इनलोगों ने कितना डांस करवाया होता |
                                                                       बाहुबली ने फिल्म साइन करने के बाद लगता है सलमान खान से एक्टिंग की टिप्स ली थी और फिल्म में उसने उस टिप्स को पूरी शिद्दत के साथ फॉलो किया | हाँ शिवमणि और कटप्पा ने अपने हिस्से के किरदार को बहुत शानदार तरीके से परदे पर जीवंत किया | इस फिल्म को बनाने में जितनी लागत आई है उतने में रशेल क्रो की ग्लैडिएटर की तरह नहीं तो कम से कम उसके आस-पास जैसा बनाया जा सकता था | लेकिन बॉलीवुड एक बार फिर अपनी आदतों से बाज नहीं आया |
                                                                       कुछ लोग आमिर की पीके पर इस फिल्म के बहाने कटाक्ष भी कर रहे थे,कि उसने भगवान को गरियाकर एक महीने में 100 करोड़ की कमाई की और बाहुबली ने शिवलिंग को उठाकर सिर्फ पांच दिनों में 200 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया | खैर ऐसा सतही विश्लेषण करने वाले कला और कलाकर को भी धर्म और जाति के दायरे में रखना चाहते हैं | उसकी चर्चा कभी बाद में की जाएगी | वैसे आमिर की पीके के सामने यह फिल्म कहीं नहीं टिकती |
                                               हाँ यह फिल्म उनलोगों को जरूर पसंद आई होगी या आएगी जो सलमान के फैन हैं या फिर वो जो सिनेमा को केवल और केवल मनोरंजन का माध्यम समझते हैं  |
                                                                         पुनःश्च -- मैंने कौन बनेगा करोड़पति के एक एपिसोड में देखा था कि जब एक contestant किसी सवाल पर अटक जाता है तो अमिताभ उसे लाइफ लाइन का प्रयोग करने की सलाह देते हैं,और वह contestant वहां बैठे दर्शकों की सलाह मानकर जवाब देता है,और जवाब गलत हो जाता है | मतलब बहुमत हमेशा सही नहीं होता | बाहुबली पार्ट टू देखने की मुझे बिलकुल भी इच्छा नहीं है | कटप्पा का क्या हुआ ये मुझे आप में से ही कोई बता दीजिएगा | 

Wednesday, 15 July 2015

मोहब्बत का इम्तहान

तुम टेनिसन की सरिता
और मैं ब्रह्मपुत्र का उफान,
अरे पगली क्यूँ ले रही हो
तुम मेरी मोहब्बत का इतना इम्तहान |
मुझे नहीं पता
कि क्या पैमाना तय किया है
तुमने इस इम्तहान का,
पर गर मैं पास हो गया
1st division  से,तो बोलो 
क्या दोगी तुम मुझे इसका इनाम |
वैसे तो मैं इस परीक्षा में
distinction  भी ला सकता हूँ 
और कुव्वत है इतनी मेरी की
कुछ विषयों में तो मैं
100\100 लाऊँ 
पर डरता हूँ
कहीं तुम दबाव में ना आ जाओ |
क्योंकि सुना है लोगों से मैंने
कि दबाव में लोग या तो निखरते हैं
या फिर बिखर जाते हैं |
तुम्हारा निखरना तो
मेरी मोहब्बत  को मोक्ष दिलाएगा 
पर गर तुम बिखर गई तो
ये मुझे ताउम्र रुलाएगा |
ऐसा नहीं है कि मैं
तुम्हारी कश्मकश नहीं समझता 
पर मेरा बावरा मन
इस इम्तहान में पास होने को है मचलता|

Friday, 3 July 2015

अब अच्छा नहीं लगता है केजरी

वो तुम्हारा विदेश की हसीन वादियों में छुट्टियां बिताना
तुम्हारे छोटे से घर का बिजली बिल लाखों में आना
फर्जी डिग्री वाले मंत्रियों के सहारे तुम्हारा नैतिकता का पाठ पढ़ाना
दिल्ली में वैट बढ़ाकर महंगाई के लिए केंद्र को गरियाना
खुद के घर में वैचारिक गंदगी की अनदेखी कर
तुम्हारा साफ़ दिखने का बहाना |
पार्टी में तानाशाही चलाकर लोगों को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाना
तुम्हारा वो बातों बातों में रूठकर धरने पर बैठ जाना
Corex और Benadryl के सहारे अपनी खांसी को दबाना
दिल्ली वालों को स्वराज के सब्जबाग दिखाना 
अपनी मैली कमीज को हरदम दूसरों से सफ़ेद बताना |
सोमनाथ जैसे सहयोगियों के सहारे तुम्हारा महिला सशक्तिकरण लाना |
अब अच्छा नहीं लगता है केजरी
तुम्हारा ये बिना कुछ किए केवल बातों की सरकार चलाना |