Thursday, 30 June 2016

लेकिन मैं यह अवार्ड नहीं लौटाऊंगा

नमस्कार मैं रवीश कुमार,प्राइम टाइम में आज हम देश में बेहद तेजी से बढ़ती असहिष्णुता पर चर्चा करेंगे,हम आपको यह बताएंगे कि मोदी सरकार के सत्ता में आने (जिसे रोकने के लिए मैंने दिन-रात एक कर दिया था ) के बाद किस तरह मीडिया की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है | हम जैसे सीलमपुरी और कापसहेड़ा बॉर्डर के आसपास रहने वाले लोगों की गरीबी दिखाकर वैचारिक रूप से दरिद्र हो जाने वाले पत्रकारों के लिए आज के माहौल में काम करना कितना मुश्किल हो गया है | कैसे इस सरकार के आते ही आमिर खान की बेचारी पत्नी पाकिस्तान जाने की बात करने लगती है | कैसे यह सरकार रॉबर्ट वाड्रा जैसे शरीफ दिखने वाले लोगों के पीछे हाथ धोकर पड़ जाती है | कैसे दादरी में गाय का मांस  मीडिया के लिए लंबे समय तक टीआरपी का जुगाड़ कर पाता  है | आज देश के हालात 1975 के आपातकाल से भी ख़राब हो गए हैं | साथ ही इस बात पर भी नजर डालेंगे कि पुरस्कार लेने और लौटाने के क्या योग्यता और पैमाने होने चाहिए | वैसे मैं आपको बता दूँ कि कल मुझे एनटी अवार्ड्स में बेस्ट हिंदी एंकर का अवार्ड मिला है और मैं इसे लौटाऊंगा नहीं | क्योंकि इसके लिए मैं दो वर्षों से कड़ी मेहनत कर रहा हूँ |
                    ये रवीश कुमार के उस प्रोग्राम ( प्राइम टाइम ) का इंट्रो था जिसके लिए इस शख्स को हिन्दी के बेस्ट एंकर का अवॉर्ड दिया गया। कल पुरस्कार लेते हुए बेशर्मी से मुस्कुराते हुए रवीश कुमार के लिए क्या अब देश में असहिष्णुता ख़त्म हो गई ? क्या अब मोदी सरकार से इसे डर नहीं लगता | दादरी का शोक क्या अब ख़त्म हो गया | क्या अब मीडिया की आवाज को दबाने की कोशिश नहीं हो रही | पुरस्कार वापसी की चीत्कार अब बंद क्यों हो गई ?
            अगर मोदी सरकार मीडिया या उससे सम्बंधित चीजों को नियंत्रित करती या करने की कोशिश करती तो NDTV अब तक बंद हो चुका होता और प्रणव राय सलाखों के पीछे होते क्योंकि इस चैनल पर करीब 2500 करोड़ के हवाला का आरोप है | और कल एनटी अवार्ड्स में उस चैनल (NDTV) को सर्वाधिक अवार्ड मिले जो मोदी जी को पानी पी-पी कर कोसता है |
                       अब यह आपलोग तय कर लीजिये कि वह शख्स कितना विश्वसनीय हो सकता है जो देश की परिस्थितियों की नकारात्मक छवि पेश कर पुरस्कार वापसी अभियान चलाता हो पर खुद पुरस्कार लेते समय बड़ी निर्लज्जता और बेशर्मी से मुस्कुराता हो |
                                               
                                                                     
                                                                            

Tuesday, 28 June 2016

मोदी जी ने अपना पहला साक्षात्कार एक पत्रकार को दिया दलाल को नहीं

अकबर के नवरत्नों के बारे में तो आप सब बखूबी जानते होंगे और अगर नहीं जानते हों तो गूगल कर लीजिएगा | अगर कुछ देर के लिए मीडिया को अकबर मान लें तो बरखा दत्त,रवीश कुमार,राजदीप सरदेसाई,पुण्य प्रसून वाजपेयी,सागरिका घोष,करण थापर,राहुल कँवल निधि राजदान,देवांग उस मीडिया के स्वघोषित नवरत्न हैं | (फर्क सिर्फ इतना है कि अकबर के नवरत्न ताउम्र अपने विचार,बुद्धि और कौशल से मुग़ल साम्राज्य की प्रतिष्ठा बढ़ाते रहे जबकि ये नवरत्न अपने स्वार्थो के लिए पत्रकारिता के पेशे का मान मर्दन कर रहे | ) ये सब लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के कुछ ऐसे आत्ममुग्ध चरित्र हैं जिन्हें लगता है कि भारतीय पत्रकारिता इन्हीं के इर्द गिर्द घूमती है और इसे पुष्पित-पल्लवित करने में इन्होंने महती भूमिका निभाई है | निष्पक्ष,निर्भीक,बेबाक पत्रकारिता के बेदाग चेहरे | अगर वाकई ऐसा है तो कल नरेंद्र मोदी जी को सत्ता के शीर्ष पर पहुँचने के बाद अपने प्रथम बहुप्रतीक्षित साक्षात्कार के लिए इन्हीं नवरत्न,निष्पक्ष चरित्रों में से किसी एक को चुनना चाहिए था | तो क्या अर्नब गोस्वामी का चयन गलत था ? मोदी जी Nation wants to know कि आपने अपने पहले साक्षात्कार के लिए अर्नब को ही क्यों चुना ? 
                                    अब जरा सोचिये अगर कल मोदी जी के साक्षात्कार का मौका इनमें से किसी को मिला होता तो प्रश्न कैसे होते ? मोदी जी का साक्षात्कार इनमें से कोई ले और गुजरात दंगों के बारे में बात ना करे तो ये तो इन नवरत्नों की निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के साथ तो गद्दारी होगी ना,तो शुरुआत गुजरात से ही तो होती
1. सर क्या आपको गुजरात दंगों पर अफ़सोस है ? 2.क्या आपने राजधर्म का पालन किया था ? 3.विजय माल्या को आपने क्यों लंदन भाग जाने दिया ? 4.ललित मोदी कब तक वापस आएँगे ? 5.मोदी जी आप राम मंदिर कब बनाएँगे ? 6.आप पाकिस्तान पर कब हमला करेंगे ? 7.आप इफ्तार पार्टी में कब जाएंगे ? 8.अच्छा ये बताइए काला धन कब वापस लाएंगे ? 9.रॉबर्ट वाड्रा कब जेल जाएंगे ? 10.एनएसजी की सदस्यता भारत को कब दिलाएंगे ? 11.बुलेट ट्रैन कब चलाएंगे ? 12.साध्वी प्रज्ञा क्या हिंदू आतंकवाद का उभरता चेहरा हैं ?
                                                                          चूँकि अर्नब के सवालों की फेहरिस्त में ऐसे सवाल नहीं थे जो इन नवरत्नों के हिसाब से पत्रकारिता के उच्च मानदंडों को छूते हैं तो जाहिर सी बात है इन्हें यह साक्षात्कार बिलकुल नहीं भाया | दरअसल  इन पत्रकारों ने अपनी दलाली (बरखा दत्त की दलाली के बारे में तो पूरा देश जानता है ) वैचारिक दलाली,टीआरपी पिपासा से पत्रकारिता के पेशे को इतना गंदा कर दिया है जहां सामान्य जन सरोकारों की चीजें इनके लिए मायने नहीं रखती |
                                       इनमें से कुछ को हमेशा बहुसंख्यकों के आगे अल्पसंख्यकों का दर्द सालता है | ये दादरी देखते समय शिव जी की तरह तीनों नेत्र खोल लेते हैं और मालदा पर सूरदास बन जाते हैं | इन्हें कांग्रेस के निकम्मे युवराज में भारत का भविष्य दिखता है वहीं मोदी जी को ये देश के लिए खतरा मानते हैं | NSG की सदस्यता ना मिलने को ये मोदी जी की व्यक्तिगत विफलता मानते हैं जबकि MTCR की सदस्यता पर इन्हें सांप सूंघ जाता है |
शुक्र है मोदी जी ने अपना पहला साक्षात्कार एक पत्रकार को दिया किसी ऐसे दलाल को नहीं जो पत्रकारिता के चौथे स्तंभ को दीमक की तरह चाट कर खोखला रहा है | 
पुनश्च
इस साक्षात्कार के बारे में कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर कुछ भी लिखना वक्त जाया करना होगा