Monday, 20 April 2020

कुछ नहीं रवीश भाई,बस पालघर में दो तीन साधुओं की लिंचिंग हुई

अनुराग की चरस लॉक डाउन 1 में ही ख़त्म हो गई थी | कुछ दिन तक दारु के स्टॉक से काम चला फिर वो भी खत्म | आजकल गार्ड से बीड़ी,खैनी मांगकर काम चला रहा | रात को ठीक से सो नहीं पा रहा,नींद नहीं आती,आती भी है तो सपने में बॉम्बे वेलवेट,रमण राघव के डरावने सीन दिखते हैं और वो उठ जाता है | दिन में सोने की कोशिश कर रहा था | अभी हल्की सी झपकी आई ही थी कि मोबाइल बजा,अरे रविश भाई कैसे हैं ? बस ठीक हूँ अनुराग,वही संविधान,लोकतंत्र,धर्मनिरपेक्षता बचाने में दिन रात लगा हूँ | नहीं-नहीं रवीश भाई आप शानदार काम कर रहे हैं | अच्छा अनुराग ये रात पालघर में कुछ हुआ था क्या ? पालघर ? भाई वैसे ज्यादा तो मुझे कुछ पता नहीं बस उड़ती खबर सुनी थी कि दो,तीन साधुओं की लिंचिंग हुई है | अच्छा,अच्छा,अरे मुझे लगा कुछ बड़ा हुआ है | नहीं भाई बड़ा क्या होगा अभी,सब शांति ही है,मेरा तो दोनों तरफ का मसाला ख़तम हो गया है | ह्म्म्मम्म,वैसे रवीश भाई आप तो इतने बड़े पत्रकार हैं आपके पास कोई खबर नहीं पहुँची ? अरे कहाँ अनुराग तुम तो जानते हो कि हमारे चैनल के उपर देश बचाने की कितनी बड़ी जिम्मेदारी है,हमलोग आजकल सिंगल सोर्स को बचाने में जी जान से जुटे हैं,इसलिए ऐसे छोटी ख़बरें हमारे सोर्स की नजरों में आते भी नहीं और वो बताते भी नहीं | ये अलग बात है कि देश बचाते बचाते हम रसातल में जा रहे | और वैसे तुम तो जानते हो 2014 में ही मुझे मेजर हर्ट अटैक आया था | उसमें मैं तो बच तो गया लेकिन मेरी दाहिने तरफ की यादाश्त कमजोर हो गई,हाँ लेफ्ट वाला अभी एकदम ठीक है | यूँ कहो कि अभी लेफ्ट 2014 के अटैक के बाद कुछ ज्यादा ही सक्रिय रहता है | ओहहह |अच्छार रविश भाई,कन्हैया की कॉल आ रही है,अच्छा ठीक है तुम बात करलो |


      कन्हैया कैसे हो ? बस भाई सब खैरियत है अल्लाह रहम रखे,अच्छा अनुराग भाई मेरे पास शेहला का फ़ोन आया था वो पूछ रही थी पालघर में कुछ ऐसा तो नहीं हुआ जिससे देश संकट में आ गया हो ? अरे नहीं पगले छोटी मोटी घटनाएं तो होती रहती हैं,हाँ अनुराग भाई इतना बड़ा मुल्क है कितनी खोज खबर ली जाय | बस अपना संविधान,लोकतंत्र सुरक्षित रहे | वो आरफा कह रही थी कल ट्विटर पे कि कैसा चल रहा है आपका लॉक डाउन,मैंने कहा बहन बस मुंबई में उद्धव जी सब शानदार तरीके से कंट्रोल कर रहे कोई दिक्कत नहीं है | अनुराग भाई इ स्वरा का फ़ोन आ रहा है,उ बेगूसराय में मनुवादी लोग एगो नीची जाति वाले को प्रेम प्रसंग में मार दिया न शायद इसी के बारे में पूछ रही होगी | अच्छा ठीक है कन्हैया अभी हम मोदी को ट्विटर पे इस घटना के लिए लताड़ते हैं,इतनी बड़ी बात हो गई और इ लोग कुछ बोले नहीं |
                                        कन्हैया मैं दो तीन दिन से बेगूसराय वाली घटना की वजह से सो नहीं पाई,क्या हो रहा है इस देश में | मैं सोच रही थी तुमसे बात करूँ लेकिन जबसे लॉक डाउन शुरू हुआ है मेरी वर्चुअल पार्टियां ख़तम ही नहीं हो रहीं | नहीं हम इ मुद्दा ट्विटर पे उठाए थे स्वरा,इसको अंजाम तक पहुंचा के रहेंगे |
जैसे जैसे रात गहरी हो रही सब अपने वैचारिक पालने में आराम फरमाने को जा रहे | देश सुरक्षित है,साधु संत मरते रहेंगे,ऐसी कौन से आफत आ गई | बहुत सी ख़बरें हैं इस देश में दिखाने को |
                                     पुनश्चः -- रवीश भाई आरफा बोल रही हूँ,हाँ आरफा अस्सलाम वालेकुम,वालेकुम अस्सलाम रविश भाई.अल्लाह ताला आपको,दीन,ईमान की खिदमत के लिए भारत रत्न से नवाजे | शुक्रिया आरफा | अच्छा रविश भाई आपने मौलाना साद को डिफेंड करने का पुरा प्लान तैयार कर लिया है न ? हाँ आरफा,मैं तो उसी दिन से इस काम पे लगा हूँ जिस दिन निजामुद्दीन वाली घटना सामने आई | वाह बहुत बढ़िया रवीश भाई | इधर आरफा तेजस्वी सूर्या के बहाने मोदी सरकार पर हमला बोलने गई उधर रवीश काली चादर तान कर सोने की तैयारी में लग गया,टीवी स्क्रीन किसी और बात पर काली होगी अभी तो सब शांति शांति है | 

Thursday, 9 April 2020

कुत्ते और इंसान

यूँ वह घर के बाहर मंडराता
पहरेदारी करता
वफादारी का प्रतीक
पर उसका इंसानों को छू जाना अपवित्र समझा जाता था
सीमाएं तय थीं उसके लिए
दरवाजे के बाहर
फिर
उसके गले में पट्टा लगा
वो मुख्य द्वार के अंदर आया
बहुत समय तक यूँ ही चलता रहा
न उसके लिए इंसान ने सीमाएं बदली 
न अपना मन 

समय का पहिया घूमा
इंसान इंसान से ऊबने लगा
एक दूसरे से कटने लगा
भरोसा कम होने लगा
फिर उसके दिन फिरे
उसके अच्छे अच्छे नाम रखे जाने लगे
उसे उसकी जाति से सम्बोधित करना असभ्य माना जाने लगा 
उसके लिए सीमाएं तोड़ी जाने लगीं
मुख्य द्वार से डाइनिंग हॉल ,
बड़े घरों का आउट हाउस भी उसके लिए कम्फ़र्टेबल नहीं रहा
क्योंकि उसका स्टेटस अब इसकी इजाजत नहीं देता
अब वो बेड रूम में आ गया
कुछ जगहों पर घरों में इंसान एक और वो दो रहने लगे
हां उसकी रखवाली के लिए शिफ्टों में चार लोग रखे जाने लगे
देखिये समय का चक्र
अब इंसान उसकी रखवाली करने लगे
पॉश इलाकों में तो जगह जगह उसके लिए क्लिनिक और डॉक्टर नजर आने लगे
अब मर्सीडीज़ में मालकिन की गोद में बैठकर शहर घूमता 
अपने स्टेटस पर गर्व करता
इंसानों को हिकारत भरी नजरों से देखने लगा
यह परिवर्तन समझना कठिन है कि
क्या मनुष्य सभ्य होकर,कुत्तों की ज्यादा क़द्र करने लगा या
एप्पल मेन,मैंगो पीपल को जानवरों से भी बदतर समझने लगा ?