आईफ़ोन, आज़ादी और टूटते रिश्ते
अमूमन कॉलेज में बच्चे दो-चार महीने के बाद दोस्त वोस्त बनाते हैं या बनते हैं पर अंजलि ने एडमिशन लेते ही काफ़ी दोस्त बना लिए थे | पढ़ाई में अच्छी थी | भाषण देना और आंदोलनों में हिस्सा लेना उसका प्रिय शग़ल था | वो भी आम लड़कियों जैसी ही थी बस उसे आज़ादी चाहिए थी | किससे अभी उसने ये सोचा नहीं था | और हाँ उसे लेटेस्ट चीजें बहुत पसंद थी जैसे हर ज़ेन जी को होती है | उसे लगता था कि वो समय और तकनीक के साथ नहीं चलेगी तो पीछे रह जाएगी |
पिता मिल्क पार्लर चलाते थे आमदनी ठीक ठाक थी और न भी थी तो कभी बेटी के शौक़ के आड़े नहीं आई | और माँ वैसी ही थी जैसे हर आम मध्यवर्गीय घरों की होती हैं |
बेटी को इतना सर मत चढ़ाओ, कुछ पैसे बचाओ कल के दिन उसकी शादी भी तो करनी है | पिता के कानों पर इन बातों से जू तक नहीं रेंगती थी | वो अक्सर कहते बस वो एक बार अपने पैरों पर खड़ी हो जाए फिर देखना |
पापा, ये आईफ़ोन आया है लेटेस्ट मॉडल iPhone Duo,
अच्छा कितने का है ?
तीन लाख का, पर आप चिंता मत करो मैंने एक दोस्त से बात की है उसके पास क्रेडिट कार्ड है आप सिर्फ डेढ़ लाख दे देना | डेढ़ लाख ? हाँ बाकी हर महीने की ईएमआई फ़िक्स हो जाएगी |
ओह्ह्ह पापा ने गहरी सांस ली, ठीक है बेटा | ओह पापा यू आर द ग्रेटेस्ट डैड इन दिस वर्ल्ड कहते हुए घर से निकल गई |
आज दुकान नहीं जाओगे क्या ? नहीं तबियत ठीक नहीं लग रही | अच्छा आराम कर लो मैं खाना लगा देती हूँ | अगले दिन फिर से वही बात | अच्छा आज अंजलि को आने दो वो दिखा देगी |
अंजलि पापा को एक बार डॉक्टर से दिखा दे |
अरे माँ मुझे कहाँ इतना समय मिल पाता है | कॉलेज के असाइंमेंट, फ़ेस्ट, प्रोटेस्ट में हिस्सा लेना देख ही रही हो तुम
एक दिन थक हारकर माँ ही डॉक्टर के पास लेकर गई | सारे टेस्ट हुए तो पता चला लिवर सिरोसिस है, क्रिटिकल स्टेज - क्या
नहीं मम्मी वो डॉक्टर अच्छा नहीं है टेस्ट ठीक से नहीं हुए होंगे | अच्छा मैं किसी दिन समय निकालती हूँ पापा को अच्छे डॉक्टर से दिखाउंगी | ये कहते हुए अंजलि कॉलेज के लिए निकल गई |
रास्ते में उसने अपने सारे सोशल मीडिया पर अपडेट किया - फीलिंग सैड | दोस्तों से जिक्र किया कि पापा बीमार हैं पर उसके दिमाग में आईफ़ोन घूम रहा था | इस जिक्र और फ़िक्र के चक्कर में वो भूल गई कि उसे पापा को दिखाना भी है |
ऑपेरशन में 3 लाख लगेंगे | अरे मुझे कुछ नहीं होगा और अभी अंजलि को आईफ़ोन भी तो दिलाना है | शाम को अंजलि आई तो माँ ने ऑपेरशन फी की बात की | माँ मुझे सुबह एक फेस्ट में जाना है कल बात करें | सुबह अंजलि जाने को तैयार हुई तो पापा ने उसके हाथ में डेढ़ लाख रखते हुए कहा बेटा ये ले जाके आईफ़ोन ले लेना | ओह पापा द ग्रेट |
वो देर रात लौटी | अरे कहाँ थी इतनी देर ? ओह मम्मी तुम सवाल बहुत पूछती हो | कॉलेज से निकल कर एप्पल स्टोर गई फिर वहाँ से एक प्रोटेस्ट में चली गई | अच्छा तो फ़ोन ले लिया तूने | हाँ तो इंतजार किस बात का करती !
सुबह माँ चाय लेकर पापा के कमरे में गई तो जोर से चिल्लाई अंजलि अंजलि | अरे क्या हुआ माँ ? अंजलि पापा | पापा नहीं रहे | वो स्तब्ध हो गई | आस-पड़ोस से सब लोग आने लगे |
इधर अंजलि ने iPhoneDuo से फीलिंग सैड वाली इमोजी के साथ अपने सारे सोशल मीडिया पर ये पोस्ट किया "पापा इज नो मोर"
इधर पापा का मृत शरीर पड़ा था उधर अंजलि का ध्यान फोन पर नोटिफिकेशन देखने में लगा हुआ था
आज़ादी अभी भी उसके ज़ेहन में चल रही थी |

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