Friday, 2 January 2026

आखिर में निकल चला एक और December

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आखिर में निकल चला एक और दिसंबर 


नवंबर से छोटा और जनवरी से बड़ा 

कम्बख्त घने कोहरे की आदत डाल खुद निकल पड़ा 

वैसे जैसे इश्क़ में डूबने से पहले ही ब्रेकअप  

और दिसंबर जनवरी के आगे नतमस्तक हो चला | 


यूँ तो नवंबर भी मेरे करीब आया था 

पर मैंने उसे गले नहीं लगाया था 


निकाली थी यादों की मफ़लर, सलवटें पड़ी शॉल 

कॉफी के वो मग, तह की हुई रजाइयां, 

गर्माहट भरे स्वेटर,और ब्लोअर सब दिसंबर के नाम पर  


धुंध में धूप का एक टुकड़ा चुराया 

सर्द यादों को सूरज का चेहरा दिखाया 

बड़ी मेहनत से अंगीठी जलाई 

पर फिर भी गर्माहट मुझे छू न पाई 

कभी टूट के जो बरसा था दिसंबर 

इस बार मुझे तन्हा सा लगा दिसंबर 




था 31 का पर लगता था 41 का 
आया था इस बार रिकॉर्ड तोड़ने 
पर प्रदूषण के आगे घुटने लगा दिसंबर 

कैलेंडर में था आख़िरी
और आखिर में निकल चला एक और दिसंबर 
छोड़ के यादों का बवंडर 
 

            

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