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विकास की अदालत और पेड़ों की अर्जी

शिव की जटा से निकली, मैं अभागी गंगा बोल रही हूँ |

ज़िंदगी के कारवां में,मैं खर्च होता चला गया

जितनी जल्दी हो सके AAP काल कलवित हो जाओ

आप के अरविंद आएँगे

Valentine Day और प्रेम के बदलते मूल्य

अपनों पे करम गैरों पे रहम

केजरी अब नहीं बनेगा जनता का घर जमाई

कितने बदल गए हम

ये कहाँ आ गए हम यूँ ही दूर-दूर चलते

हे राम तुम कैसे मर्यादा पुरुषोत्तम थे

मोदी,मैजिक और मतदाता

एक वो दिन आएगा