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और तुम उन्हें लाहौर का मरहम लगाओ |

ऐसी स्वतंत्रता दिवस मनाकर क्या ये देश महान होगा ?

तुम्हारे चेहरे पर पड़ी पसीने की बूंदें

मोहब्बत का इम्तहान

अब अच्छा नहीं लगता है केजरी

शिव की जटा से निकली, मैं अभागी गंगा बोल रही हूँ |

आप के अरविंद आएँगे

केजरी अब नहीं बनेगा जनता का घर जमाई

कितने बदल गए हम

ये कहाँ आ गए हम यूँ ही दूर-दूर चलते

एक वो दिन आएगा

बदलता शहर

बचपन और जवानी

आतंकवाद और हम

मैं हिंदी हूँ

जीवन, मृत्यु

मोहब्बत

ईमानदारी