बिहार में कब ख़तम होगी कागज़ी शराबबंदी ? बिहार में शराबबंदी भगवान की तरह हो गई है—दिखती कहीं नहीं, ले...
बिहार में कब ख़तम होगी कागज़ी शराबबंदी ? बिहार में शराबबंदी भगवान की तरह हो गई है—दिखती कहीं नहीं, ले...
ब्रेकअप का अर्थशास्त्र वह जीवन में आई थी एक स्टार्टअप की तरह, उसकी बातों में श...
विकास का वृद्धाश्रम गाँव की वह पुश्तैनी हवेली, बाप-दादाओं के पसीने से सींची हुई थोड़ी ज़मीन और इकलौता बेटा—यही उसकी दुनिया थी। माँ ने अपनी ...
फ़ाइलों का गुलाबी मौसम और एक पुल की 'आत्महत्या' सुना है कि उसकी तबीयत काफी अरसे से नासाज़ थी। लोग उससे मिलने जाते, उसकी तस्वीरें खींच...
बंगाल चुनाव: झालमुड़ी का जायका या मछली का दम? कल पाँच राज्यों के चुनाव परिणाम आएंगे, लेकिन सबकी निगाहें बंगाल पर टिकी हैं। सवाल बड़ा है—'...
चित्रा टॉकीज और देबू की झालमुड़ी तीन-चार दिन पहले ट्विटर पर ' झालमुड़ी ' ट्रेंड होते ...
मच्छर: इंसानियत का भिनभिनाता सच वो बिना किराया दिए बरसों से हमारे ही घर में कुंडली म...
दिल्ली एनसीआर की "BMW" लाइफ और वो 10 रुपये वाली गिल्ट ट्रिप दिल्ली की "BMW" लाइफ और वो 10...
आख़िरकार नीतीश कुमार भी दिल्ली चले गए थोड़ा लेट पोस्ट है तो इसमें कोनो बड़ा बात तो नहीं है ! बिहार में कौन चीज ...
ट्रंप की ज़िद और अमेरिका का साम्राज्यवादी हरम आखिर ट्रम्प ने निकोलस को अपने साम्राज्यवादी ...
आखिर में निकल चला एक और दिसंबर नवंबर से छोटा और जनवरी से बड़ा कम्बख्त घने कोहरे की आदत डाल खुद निकल पड़ा वैसे जैसे इश्क़ में डूबने से पहले ह...
नहीं ये लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ है पुरे चुनाव के दौरान धृतराष्ट्र और गांधारी के ओजस्वी बेटे ने माँ बाप का मुँह नहीं देखा | उसे डर था कि कहीं...
एक अलसाई सी सुबह मैं बिस्तर से निकल नहीं पा रहा था उसने मुझे मोहपाश में ऐसे बाँध कर रखा था जैसे चुनावों के वक्त नेता जनता को रखते हैं | मै...
मास्क लगे चेहरे हैं, दर्द बड़े गहरे हैं टूटता तिलिस्म आज इंसान से भय खाता हूं छोटी मोटी जरूरतों को नजरअंदाज कर जाता हूं, लगी कुछ ऐसी नज़र सह...
कितना सच कितना झूठ रोज दिखा रहे हैं ये अहम सबूत, हर रोज हो रहा नया खुलासा टीआरपी के लिए हो रहा सब तमाशा | लोकतंत्र का चौथा स्तंभ सब कह...
बात 2006 की है,प्रमोद महाजन के भाई ने उन्हें गोली मार दी थी और वो अस्पताल में भर्ती थे | मुझे जहाँ तक याद है,एक चैनल के एंकर ने अस्पताल के ...
उम्मीदों का बोझ बहुत भारी होता है | और जब आपने विकी डोनर,पिंक,पिकू,मद्रास कैफे जैसी उम्दा फिल्में देखी हों तो शुजीत सरकार जैसे मंझे हुए निर...
रोटी तुम्हें गांव से शहर की ओर ले गई थी अब वही तुम्हें शहरों से गांव की ओर खींच रही है मुल्क के लिए अभी यह मुद्दा है लाख टके का सवाल है...
अनुराग की चरस लॉक डाउन 1 में ही ख़त्म हो गई थी | कुछ दिन तक दारु के स्टॉक से काम चला फिर वो भी खत्म | आजकल गार्ड से बीड़ी,खैनी मांगकर काम चला...
यूँ वह घर के बाहर मंडराता पहरेदारी करता वफादारी का प्रतीक पर उसका इंसानों को छू जाना अपवित्र समझा जाता था सीमाएं तय थीं उसके लिए दरवाज...
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